[2026:RJ-JP:5930]
HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN
BENCH AT JAIPUR
S.B. Criminal Miscellaneous Bail Application No. 1951/2026
Indrajeet Kumar Nishad ----Petitioner
Versus
Union Of India, Through Special Pp ----Respondent
For Petitioner(s): Mr. Kunal Sharma
For Respondent(s): Mr. Jitendra Singh Poonia, Spl. PP
HON'BLE MRS. JUSTICE SHUBHA MEHTA
[NyayVidhan notes: stored from the official Rajasthan High Court PDF (hcraj file 203800019512026_2.pdf, 4 pages); the PDF is authoritative. (1) The order is written in Hindi in the legacy Kruti Dev font; NyayVidhan converted it to Unicode Devanagari and compared it with the printed pages. The words the order prints in English (the file number, the NDPS sections, 'Hydroponic Weed', 'THC content (Delta-9-tetrahydrocannabinol)', 'Thai Bhat', the two cited orders) are kept as printed. (2) The order's paragraphs are not numbered; the numbers 1-6 were added by NyayVidhan at the order's own paragraph breaks, for reference only. The two orders listed in para 3 (printed '1.' and '2.') are shown as (1) and (2). (3) The cause title is abridged: the petitioner's parentage, age, address and place of custody are omitted. In para 5 the names of three other persons said to have surfaced in the investigation as members of the gang are withheld by NyayVidhan; they are not parties. (4) Spellings are kept as printed, including 'विरूद्ध' (para 2), 'करोड रूपये' (paras 3, 5), 'बढ' (paras 3, 5), 'इनकार' (para 3) and 'इन्कार' (para 5), 'Thai Bhat' (para 5) and 'JIA-Cum-Prev-Jodhpur' (para 1); a stray floating ra-sign printed before 'स्वरूप' (paras 3, 5) is left out. The quantity is given as 5 kg 900 g in the petitioner's submission (para 2) and as 5 kg 920 g in the Court's discussion (para 5), as printed. No 'Reportable' mark is printed. Page furniture (running heads, page numbers, upload/download stamps, staff initials, TCPDF line) is removed.]
[Source: Rajasthan High Court, hcraj.nic.in — order dated 09.02.2026.]
Order
09/02/2026
1. प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अन्तर्गत अपनी नियमित जमानत हेतु यह प्रार्थना-पत्र पत्रावली संख्या ARPT/AIU/NDPS/85/2025-JIA-Cum-Prev-Jodhpur अपराध अन्तर्गत धारा 8(c), 20(b) (ii) (B), 23, 29 N.D.P.S. Act में जमानत का लाभ दिए जाने की प्रार्थना के साथ पेश किया गया है।
2. विद्वान अधिवक्ता प्रार्थी/अभियुक्त का तर्क है कि प्रार्थी/अभियुक्त को प्रकरण में मिथ्या संलिप्त किया गया है। प्रार्थी/अभियुक्त पर यह आक्षेप लगाया गया है कि उसके द्वारा बैंकाक से 5 किलो 900 ग्राम Hydroponic Weed (गांजा) को तस्करी करके लाया गया। उनका तर्क है कि मादक पदार्थ की उक्त मात्रा एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रावधानों के अन्तर्गत अधिसूचित व्यवसायिक मात्रा से कम है। इस प्रकार के मादक पदार्थ की व्यवसायिक मात्रा 20 किलोग्राम है। उनका तर्क है कि प्रार्थी-अभियुक्त के विरूद्ध पूर्व का कोई आपराधिक प्रकरण संस्थित नहीं है। वह दिनांक 16.10.2025 से निरन्तर न्यायिक अभिरक्षा में चल रहा है। मामले में परिवाद (आरोप-पत्र) प्रस्तुत हो चुका है। प्रकरण की अन्वीक्षा में समय लगेगा। अतः उसे जमानत पर मुक्त किया जाए।
3. इसके विपरीत विद्वान विशेष लोक अभियोजक ने तर्क प्रस्तुत किया कि प्रार्थी-अभियुक्त द्वारा उक्त मादक पदार्थ Hydroponic Weed अवैध रूप से तस्करी कर बैंकाक से भारत लाया गया है। उनका तर्क है कि यद्यपि एन.डी.पी.एस. एक्ट में Hydroponic Weed को मादक पदार्थ (गांजा) से पृथक नहीं किया गया, परन्तु Hydroponic Weed कोई साधारण गांजा नहीं है, बल्कि यह एक गांजा का एक विशेष और अत्यधिक शक्तिशाली स्वरूप है, जिससे मादक पदार्थ में THC content (Delta-9-tetrahydrocannabinol) की मात्रा बढ जाती है, जो इसे कहीं अधिक खतरनाक और नशे की लत (Addictive) वाला बनाता है। उनका तर्क है कि प्रार्थी-अभियुक्त के आधिपत्य से जो मादक पदार्थ बरामद हुआ है, उसका 1 किलोग्राम वजन का अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में मूल्य करीब एक करोड रूपये है तथा इस प्रकार प्रार्थी-अभियुक्त के आधिपत्य से करीब छह करोड मूल्य का मादक पदार्थ, जो बैंकाक से तस्करी करके लाया गया था, बरामद हुआ है। उनका तर्क है कि प्रार्थी-अभियुक्त द्वारा एक सोची-समझी योजना के तहत एक संगठित अपराध में सक्रिय योगदान करते हुए अपराध कारित किया गया है, जो अत्यन्त गंभीर अपराध है। उनका तर्क है कि इस न्यायालय की समकक्ष पीठ द्वारा इसी प्रकृति के निम्नांकित मामलों में बरामदशुदा मादक पदार्थ की मात्रा ‘व्यवसायिक मात्रा’ से कम होने के बावजूद अभियुक्तगण को जमानत देने से इनकार किया गया है, अतः जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाये। अपने तर्क के समर्थन में उनकी ओर से निम्न न्यायिक विनिश्चय प्रस्तुत किए :-
(1) Order Passed by Rajasthan High Court, Bench Jaipur in the matter of Karan Mehra Vs. Union of India (Customs Department), Jaipur in S.B. Criminal Misc. Bail Application No. 8926/2025 on Dated 7.10.2025
(2) Order Passed by Rajasthan High Court, Bench Jaipur in the matter of Mir Shahid Hussain Vs. Union of India (Customs Department), Jaipur in S.B. Criminal Misc. Bail Application No. 13352/2025 on Dated 27.11.2025
4. प्रत्युत्तर में विद्वान अधिवक्ता प्रार्थी-अभियुक्त का तर्क है कि विद्वान विशेष लोक अभियोजक द्वारा जो न्यायिक दृष्टांत प्रस्तुत किए गये हैं, उन दोनों मामलों में बरामदशुदा मादक पदार्थ की मात्रा वर्तमान प्रकरण में बरामदशुदा मादक पदार्थ की मात्रा से बहुत ज्यादा थी।
5. दोनों पक्षों के तर्कों पर मनन किया गया। पत्रावली का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया गया। प्रार्थी-अभियुक्त पर यह आक्षेप है कि वह दिनांक 15.10.2025 को बैंकाक से जयपुर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, जहां उसने ‘ग्रीन-चैनल’ से निकलने का प्रयास किया। इसी दौरान एक्सरे मशीन से जांच करने पर उसके सामान में कुछ संदिग्ध वस्तु दिखाई दी, जिसकी जांच करने पर यह संदिग्ध सामान बारदाना सहित 6 किलो 220 ग्राम हाईड्रोपोनिक वीड पाया गया, जिसमें से बारदाना अलग करने पर हाईड्रोपोनिक वीड (जो गांजे का परिष्कृत रूप है), का वजन 5 किलो 920 ग्राम होना पाया गया। उल्लेखनीय है कि बरामदशुदा Hydroponic Weed कोई साधारण गांजा नहीं है, बल्कि यह एक गांजा का एक विशेष और अत्यधिक शक्तिशाली स्वरूप है, जिससे मादक पदार्थ में THC content (Delta-9-tetrahydrocannabinol) की मात्रा बढ जाती है। यह THC content (Delta-9-tetrahydrocannabinol) गांजा का प्राथमिक मनोसक्रिय यौगिक (Primary psychoactive compound) है, जो इसे कहीं अधिक खतरनाक और नशे की लत (Addictive) वाला बनाता है। ऐसे मादक पदार्थ युवाओं को आकर्षित करते है और गंभीर सामाजिक समस्या उत्पन्न करते है। इस बरामदशुदा Hydroponic Weed की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब छह करोड रूपये है। अब तक किये गये अनुसंधान से प्रार्थी-अभियुक्त द्वारा एक ऐसे संगठित गिरोह के सदस्य के रूप में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए यह अपराध कारित करना पाया गया है, जो लोगों को मौज-मस्ती करने के लिए कुछ राशि देकर विदेश भेजते है तथा उन्हें भारत में तस्करी के लिए मादक पदार्थ देते है। अनुसंधान से प्रार्थी-अभियुक्त द्वारा भी इसी गिरोह के सदस्यों से कुछ राशि रूपये (Indian Rupees) व थाई भात (Thai Bhat) के रूप मे लेकर मादक पदार्थ की तस्करी करना प्रकट हुआ है। अन्वेषण अधिकारी द्वारा उसके भारतीय स्टेट बैंक खाता का विवरण भी जांच हेतु मंगवाया है। संगठित गिरोह के सदस्य के रूप में अन्य कुछ व्यक्तियों के नाम जैसे [names withheld by NyayVidhan] आदि के नाम भी अन्वेषण में प्रकट हुए हैं। इस न्यायालय की समकक्ष पीठ ने अभियुक्तगण को उपर्युक्त वर्णित ऐसे मामलों में जमानत की सुविधा देने से इन्कार किया है। प्रार्थी-अभियुक्त द्वारा तस्करी किया गया मादक पदार्थ (Hydroponic Weed) की प्रकृति तथा उसका उच्च मूल्य (जो अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में करीब छह करोड रूपये है) तथा एक ड्रग-सिंडिकेट से प्रार्थी-अभियुक्त के सम्बन्ध आदि तथ्यों को देखते हुए इस प्रक्रम पर मामले के गुणावगुण पर कोई टिप्पणी किए बिना प्रार्थी-अभियुक्त का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता।
6. परिणामतः प्रार्थी-अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत यह जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं होने से निरस्त किया जाता है।
(SHUBHA MEHTA),J
Indrajeet Kumar Nishad v. Union of India
The text below is reproduced from the judgment for reference. The article summarises the Court's decision; refer to the original judgment for the authoritative text.