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Thursday, October 29, 2026

Surendra Khinchi v. Bar Council of Rajasthan & Ors.

2026:RJ-JP:35534 · Rajasthan High Court · 3 September 2026

S.B. Civil Writ Petition No. 9369/2026

Source Rajasthan High Court, decided 03.09.2026

The text below is reproduced from the judgment for reference. The article summarises the Court's decision; refer to the original judgment for the authoritative text.

[2026:RJ-JP:35534]

HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR

S.B. Civil Writ Petition No. 9369/2026
CNR: RJHC020492832026 | URN: CW / 20877U / 2026

Surendra Khinchi ----Petitioner
Versus
The Bar Council of Rajasthan, through its Chairman, Jodhpur; High Court of Judicature for Rajasthan, through Registrar General; State of Rajasthan, through Chief Secretary; Advocate General, Rajasthan; The Bar Council of India, through its Secretary, New Delhi ----Respondents

For Petitioner(s): Mr. Vishal Soni
For Respondent(s): Mr. Prateek Kasliwal; Mr. Sandeep Pathak; Mr. Arnab Singh; Mr. Nikhilesh Katara

HON'BLE MRS. JUSTICE SHUBHA MEHTA

Order

Date of conclusion of arguments: 27.07.2026
Date on which the judgment was reserved: 27.07.2026
Whether the full judgment or only the operative part was pronounced: Full judgment
Date of Pronouncement: 03-09-2026

[NyayVidhan notes: (1) the order is in Hindi; the official PDF uses a legacy KrutiDev font, converted here to Unicode. (2) The order has no paragraph numbers; the numbers 1-8 are NyayVidhan's own, added for reference. (3) The petitioner's parentage and address in the cause title are omitted.]

1. यह याचिका याचिकाकार की ओर से इस आशय की प्रस्तुत की गई है कि वह डॉ0 भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर से वर्ष 2025 का विधि स्नातक है। उसने बार राजस्थान अधिवक्ता परिषद में एडवोकेट के रूप में अपना नामांकन करवाने के लिए अधिवक्ता अधिनियम 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत एक प्रार्थना-पत्र मय आवश्यक दस्तावेज एवं शुल्क अयाची संख्या-1 को प्रस्तुत कर दिया। उसने ई-मेल के जरिए भी एक प्रतिवेदन इसी आशय के लिए पृथक से प्रेषित किया। परंतु राजस्थान अधिवक्ता परिषद के चल रहे चुनावों एवं प्रशासनिक कारणों से उसका प्रार्थना-पत्र अभी तक निस्तारित नहीं किया गया है।

2. बहस सुनी गई।

3. दौराने बहस विद्वान अधिवक्ता याची का तर्क रहा है कि याची का नामांकन नहीं होने के कारण याची को भारी परेशानी हो रही है तथा उसके विधि व्यवसाय प्रारम्भ करने के अधिकार विपरीत रूप से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उसका व्यावसायिक कैरियर एवं आजीविका को भी गम्भीर संकट उत्पन्न हो गया है। अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 58 के अंतर्गत प्रावधान हैं कि यदि राज्य अधिवक्ता परिषद जब अपने कार्य करने में असमर्थ हो तो नामांकन सम्बन्धी कार्य माननीय उच्च न्यायालय द्वारा संपादित किए जावेंगे। नामांकन प्रक्रिया को चुनावों एवं प्रशासनिक कारणों से अनिश्चित काल के लिए टाला नहीं जा सकता है। अत: याची के पक्ष में रिट जारी कर अयाचीगण को आदेश दिया जावे कि वे याची का नामांकन अविलम्ब यथाशीघ्र एक निश्चित समयावधि में पूर्ण करें अथवा विकल्प में धारा 58 अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत विधि अनुसार उसका नामांकन करने के लिए अयाची संख्या-2 को निर्देशित किया जावे।

4. अयाचीगण की ओर से अग्रिम नोटिस पर विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित हैं, जिन्होंने प्रकट किया कि वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया के चलते नामांकन सम्बन्धी कार्य नही हो रहे हैं तथा ऐसे कार्यों को करने के लिए किसी प्रकार की कोई समिति गठित नहीं हो रखी है। पूर्व में दिनांक 24.02.2026 को ऐसे कार्यों के लिए समिति बनाई हुई थी जिसे उच्च स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षण समिति द्वारा दिनांक 12.03.2026 को निरस्त कर दिया है। अत: प्रार्थी सहित अन्य कई अभ्यर्थियों को वर्तमान में कोई समिति अस्तित्व में नहीं होने से नामांकन (Enrollment) के कार्य में परेशानी हो रही है।

5. विचार किया गया। पत्रावली का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया गया।

6. पत्रावली के अध्ययन से प्रकट होता है कि पक्षकारों के मध्य यह स्वीकृत स्थिति है कि याची की ओर से नामांकन हेतु प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर रखा है, जो अभी अयाचीगण के पास लम्बित है तथा इस प्रकरण की बहस के समय तक अधिवक्ता परिषद के चुनावों की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई थी तथा नामांकन के कार्य हेतु कोई समिति कार्यरत नहीं थी। जो तदर्थ समिति गठित की गई थी वह दिनांक 12.03.2026 के आदेश से निरस्त कर दी गई थी, इस कारण याचिकाकार के प्रार्थना-पत्र का निस्तारण नहीं हुआ है।

7. वर्तमान में अधिवक्ता परिषद राजस्थान के चुनावों की प्रक्रिया सम्पन्न हो चुकी है एवं परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं, इस तथ्य का न्यायिक संज्ञान इस न्यायालय द्वारा लिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में याची द्वारा प्रस्तुत याचिका स्वीकार कर उसका एडवोकेट के रूप में नामांकन करवाने के लिए प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र का निस्तारण किए जाने के आदेश प्रदान किया जाना उचित प्रतीत होता है। जैसा कि ऊपर भी उल्लेख किया गया है, अयाचीगण द्वारा यह संज्ञान में लाया गया है कि कई अभ्यर्थियों के इसी प्रकार के प्रार्थना-पत्र एडवोकेट के रूप में नामांकन हेतु लम्बित हैं। अभ्यर्थियों के एडवोकेट के रूप में अधिवक्ता परिषद राजस्थान में नामांकन में विलम्ब से उन्हें कठिनाई हो रही है तथा उनकी आजीविका के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में याचिका स्वीकार करते हुए अयाची संख्या-1 अधिवक्ता परिषद राजस्थान को यह निर्देश दिए जाते हैं कि एडवोकेट के रूप में नामांकन हेतु आज दिनांक तक लम्बित प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण दिनांक 09.09.2026 तक विहित प्रक्रिया के अनुसार करंे और सम्बन्धित अभ्यर्थियों को सूचित करें।

8. तदनुसार याचिका, स्थगन एवं विविध प्रार्थना-पत्र यदि कोई हों तो उनका निस्तारण किया जाता है।

(SHUBHA MEHTA),J
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