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Saturday, October 24, 2026

Sanni v. C.B.N., Pratapgarh

2026:RJ-JD:6737 · Rajasthan High Court · 5 February 2026

S.B. Criminal Miscellaneous 2nd Bail Application No. 10917/2025

The text below is reproduced from the judgment for reference. The article summarises the Court's decision; refer to the original judgment for the authoritative text.

[2026:RJ-JD:6737]

HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN AT JODHPUR

S.B. Criminal Miscellaneous 2nd Bail Application No. 10917/2025

Sanni ----Petitioner
Versus
C.b.n, Pratapgarh ----Respondent

For Petitioner(s): Mr. Ramesh Chandra Purohit
For Respondent(s): Mr. K.S. Nahar, Spl. PP for CBN with Mr. Gopal Singh Shekhawat

[NyayVidhan notes: Stored from the official Rajasthan High Court PDF of the order (hcraj file 205300109172025_2.pdf, 3 pages, uploaded 06.02.2026). (1) The order is written in Hindi. Its text is set in the legacy Kruti Dev font in the PDF and was converted to Unicode Devanagari by NyayVidhan and checked against the rendered pages; the dashes of the print appear as hyphens. Two conversion breaks were mended: the nukta in 'प्रतापगढ़' (paragraph 1) and the visarga in 'मनः' (paragraph 1), 'अतः' (paragraphs 3 and 7) and 'परिणामतः' (paragraph 8). (2) The order's paragraphs are not numbered. The numbers 1-8 were added by NyayVidhan at the order's own paragraph breaks (first-line indents), for reference only; they are not the Court's numbers. (3) The text is as printed, including '03.036' and 'जान-पूछकर उपस्थित' (paragraph 3) and 'वाणिज्यक' (paragraph 4). (4) One name in paragraph 3 is replaced by '[name withheld]': the order describes the larger recovery as made from the joint possession of that person and 'another' child in conflict with law, so that person may himself be a child in conflict with law, and NyayVidhan does not identify children in conflict with law. The order names no other co-accused. (5) The cause title is abridged: the petitioner's parentage, age, address and place of custody are omitted. (6) Page furniture (QR codes, page numbers, running heads, upload/download stamps, staff initials and the TCPDF line) is removed. The PDF hosted with this page is the Court's copy with that one name redacted by NyayVidhan; nothing else is changed.]

[Source: Rajasthan High Court, hcraj.nic.in — order dated 05.02.2026.]

HON'BLE MR. JUSTICE CHANDRA PRAKASH SHRIMALI

Order

05/02/2026

1. प्रार्थी/अभियुक्त की ओर से अपनी नियमित जमानत हेतु यह द्वितीय जमानत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (धारा 439 दं.प्र.सं.) पुलिस थाना सीबीएन, प्रतापगढ़, जिला प्रतापगढ़ में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 01/2024 अपराध अन्तर्गत धारा 8/18 स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम में पेश किया गया है।

2. प्रार्थी/अभियुक्त का प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र इस न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 16.05.2025 के माध्यम से विस्तृत आदेश कर खारिज किया गया है।

3. प्रार्थी/अभियुक्त के विद्वान अभिभाषक का बहस के दौरान तर्क रहा है कि इस प्रकरण में [name withheld] तथा विधि से संघर्षरत अन्य बालक के संयुक्त कब्जे से कुल 2.002 किलोग्राम अफीम बरामद हुई है, जो कि वाणिज्यिक मात्रा से कम है। विधि से संघर्षरत उन 2 बालकों के कब्जे से 1.034 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई, जो वाणिज्यिक मात्रा से कम है। दोनों मोटरसाईकिल से बरामद कुल 03.036 किलोग्राम बरामद मात्रा वाणिज्यिक मात्रा है। प्रार्थी/अभियुक्त सन्नी पर यह आरोप है कि उसने मादक पदार्थ की आपूर्ति की। जिन अभियुक्तगण के कब्जे से मादक पदार्थ बरामद हुआ है, उनकी जमानत समकक्ष पीठ द्वारा ली जा चुकी है। प्रार्थी/अभियुक्त से बरामदगी नहीं हुई है। प्रार्थी/अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत हो चुका है। प्रार्थी/अभियुक्त दिनांक 27.02.2025 को अभिरक्षा से भागा था और उसके 2 घंटे बाद ही वह वापस गिरफ्तार हो गया, ऐसी स्थिति में प्रार्थी/अभियुक्त लंबी अवधि से जान-पूछकर उपस्थित रहा हो, यह स्पष्ट नहीं है। प्रार्थी/अभियुक्त दिनांक 25.02.2025 से अभिरक्षा में चल रहा है। मुख्य अभियुक्तगण जिनके कब्जे से मादक पदार्थ बरामद हुए उनका जमानत प्रार्थना पत्र संख्या 12228/2024 आदेश दिनांक 01.10.2024 को इस न्यायालय की समकक्ष पीठ के द्वारा ली जा चुकी है। प्रार्थी/अभियुक्त पर अन्य कोई मुकदमा नहीं है। प्रकरण के विचारण में समय लगेगा, अतः प्रार्थी/अभियुक्त का जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाकर उसे जमानत पर रिहा किया जावे।

4. विद्वान लोक अभियोजक का बहस के दौरान तर्क रहा है कि यह सही है कि दो मोटरसाईकिल पर सवार 4 व्यक्तियों से पृथक-पृथक जो अफीम बरामद हुई है, वह पृथक-पृथक तो वाणिज्यक मात्रा से कम है, लेकिन संयुक्त रूप से वाणिज्यिक मात्रा से अधिक है। प्रार्थी/अभियुक्त पर यह आरोप है कि उसने अवैध मादक पदार्थ अफीम विक्रय किया है, प्रार्थी/अभियुक्त के विरूद्ध आरोपित अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए यह द्वितीय जमानत प्रार्थना पत्र खारिज किया जावे।

5. मैंने उभय पक्षों की ओर से प्रस्तुत तर्कों पर मनन किया तथा पत्रावली का अवलोकन किया।

6. वर्तमान प्रकरण में 2 पृथक पृथक मोटरसाइकिल पर सवार व्यक्तियों से जो मादक पदार्थ बरामद हुए हैं, वे पृथक पृथक रूप से वाणिज्यिक मात्रा से कम हैं, लेकिन संयुक्त रूप से वाणिज्यिक मात्रा से अधिक हैं। Akhlak @ Vilsan Vs. State of Rajasthan; 2010 (2) CriLR 1542 = 2010 WLC 553 विनिश्चय के अनुसार जहां दो या उससे अधिक अभियुक्तों से मादक पदार्थ बरामद होते हैं, तो प्रत्येक अभियुक्त से पाये जाने वाले मादक पदार्थ के अनुरूप पदार्थ की गणना की जायेगी। जिन अभियुक्तगण के कब्जे से मादक पदार्थ बरामद हुए हैं, उनकी जमानत समकक्ष न्यायालय द्वारा ली जा चुकी है। प्रार्थी/अभियुक्त करीब 1 वर्ष से अभिरक्षा में चल रहा है। प्रकरण में कुल 9 में से 7 गवाह के बयान लेखबद्ध होने शेष बताए गए हैं। प्रकरण के विचारण में समय लगेगा।

7. अतः प्रकरण के तथ्यों, परिस्थितियों, प्रस्तुत तर्कों तथा प्रार्थी/अभियुक्त की अभिरक्षा अवधि को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण के गुण-दोषों पर टिप्पणी किये बिना प्रार्थी/अभियुक्त को जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत होता है।

8. परिणामतः प्रार्थी/अभियुक्त सन्नी पुत्र श्री वरदीचन्द की ओर से प्रस्तुत यह जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है और आदेश दिया जाता है कि यदि प्रार्थी इस मामले में विद्वान विचारण न्यायालय के संतोषप्रद, उनके न्यायालय में नियत तिथियों पर एवं जब भी उसे तलब किया जावे, उपस्थिति हेतु एक लाख रूपये का व्यक्तिगत बंधपत्र व पचास-पचास हजार रूपये की दो सुदृढ़ एवं विश्वसनीय प्रतिभूतियां प्रस्तुत करे तथा उसकी किसी अन्य प्रकरण में आवश्यकता न हो तो उसे हस्तगत प्रकरण में जमानत पर रिहा कर दिया जावे।

(CHANDRA PRAKASH SHRIMALI),J
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